यह सोचने का विषय जरूर है कि कैसे भारत के हर राज्य में लोगों की जाति के अनुसार उन्हें बांटा गया है और यह संख्या हजारों में है, जो कि विभिन्न राज्यों में हमें दिखती है। अगर हम इसकी सूची पर ध्यान दें तो, हमें अनेकों ऐसे भारत में रह रहे जनजातियाँ दिखेंगे, जो सरनेम के आधार पर लोगो के सामने हैं, अब इसमें दो पक्ष के लोग हैं, जो इसे सही मानते हैं और गलत मानते हैं, एक पक्ष सोचता हैं की इन सूचियों द्वारा भेदभाव और गलत संदेश दिखाने की कोशिश हो रही है।
किंतु एक पक्ष ऐसा है कि इसे एक व्यवस्था के रूप में देखता है, अब यह एक व्यवस्था हो या फिर भेदभाव इस पर विचार करने की जरूरत हम सभी को है, भारत के अन्य प्रांतों में जातियों को वर्गीकृत (Category) तरीके से विभाजित किया गया है। हर...